Book 6 • Chapter 96
Section 96
8 verses
Verse 1
अंतरधान भयउ छन एका पुनि प्रगटे खल रूप अनेका
Verse 2
रघुपति कटक भालु कपि जेते जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते
Verse 3
देखे कपिन्ह अमित दससीसा जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा
Verse 4
भागे बानर धरहिं न धीरा त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा
Verse 5
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन गर्जहिं घोर कठोर भयावन
Verse 6
डरे सकल सुर चले पराई जय कै आस तजहु अब भाई
Verse 7
सब सुर जिते एक दसकंधर अब बहु भए तकहु गिरि कंदर
Verse 8
रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी
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