Book 6 • Chapter 97
Section 97
8 verses
Verse 1
प्रभु छन महुँ माया सब काटी जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी
Verse 2
रावनु एकु देखि सुर हरषे फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे
Verse 3
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे फिरे एक एकन्ह तब टेरे
Verse 4
प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए तरल तमकि संजुग महि आए
Verse 5
अस्तुति करत देवतन्हि देखें भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें
Verse 6
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल अस कहि कोपि गगन पर धायल
Verse 7
हाहाकार करत सुर भागे खलहु जाहु कहँ मोरें आगे
Verse 8
देखि बिकल सुर अंगद धायो कूदि चरन गहि भूमि गिरायो
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