Book 5 • Chapter 35
Section 35
20 verses
Verse 1
प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा गरजहिं भालु महाबल कीसा
Verse 2
देखी राम सकल कपि सेना चितइ कृपा करि राजिव नैना
Verse 3
राम कृपा बल पाइ कपिंदा भए पच्छजुत मनहुँ गिरिंदा
Verse 4
हरषि राम तब कीन्ह पयाना सगुन भए सुंदर सुभ नाना
Verse 5
जासु सकल मंगलमय कीती तासु पयान सगुन यह नीती
Verse 6
प्रभु पयान जाना बैदेहीं फरकि बाम अँग जनु कहि देहीं
Verse 7
जोइ जोइ सगुन जानकिहि होई असगुन भयउ रावनहि सोई
Verse 8
चला कटकु को बरनैं पारा गर्जहि बानर भालु अपारा
Verse 9
नख आयुध गिरि पादपधारी चले गगन महि इच्छाचारी
Verse 10
केहरिनाद भालु कपि करहीं डगमगाहिं दिग्गज चिक्करहीं
Verse 11
चिक्करहिं दिग्गज डोल महि गिरि लोल सागर खरभरे
Verse 12
मन हरष सभ गंधर्ब सुर मुनि नाग किन्नर दुख टरे
Verse 13
कटकटहिं मर्कट बिकट भट बहु कोटि कोटिन्ह धावहीं
Verse 14
जय राम प्रबल प्रताप कोसलनाथ गुन गन गावहीं
Verse 15
सहि सक न भार उदार अहिपति बार बारहिं मोहई
Verse 16
गह दसन पुनि पुनि कमठ पृष्ट कठोर सो किमि सोहई
Verse 17
रघुबीर रुचिर प्रयान प्रस्थिति जानि परम सुहावनी
Verse 18
जनु कमठ खर्पर सर्पराज सो लिखत अबिचल पावनी
Verse 19
एहि बिधि जाइ कृपानिधि उतरे सागर तीर
Verse 20
जहँ तहँ लागे खान फल भालु बिपुल कपि बीर
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