Book 7 • Chapter 102
Section 102
10 verses
Verse 1
अबला कच भूषन भूरि छुधा धनहीन दुखी ममता बहुधा
Verse 2
सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता मति थोरि कठोरि न कोमलता
Verse 3
नर पीड़ित रोग न भोग कहीं अभिमान बिरोध अकारनहीं
Verse 4
लघु जीवन संबतु पंच दसा कलपांत न नास गुमानु असा
Verse 5
कलिकाल बिहाल किए मनुजा नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा
Verse 6
नहिं तोष बिचार न सीतलता सब जाति कुजाति भए मगता
Verse 7
इरिषा परुषाच्छर लोलुपता भरि पूरि रही समता बिगता
Verse 8
सब लोग बियोग बिसोक हुए बरनाश्रम धर्म अचार गए
Verse 9
दम दान दया नहिं जानपनी जड़ता परबंचनताति घनी
Verse 10
तनु पोषक नारि नरा सगरे परनिंदक जे जग मो बगरे
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