Book 7 • Chapter 109
Section 109
16 verses
Verse 1
एहि कर होइ परम कल्याना सोइ करहु अब कृपानिधाना
Verse 2
बिप्रगिरा सुनि परहित सानी एवमस्तु इति भइ नभबानी
Verse 3
जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा मैं पुनि दीन्ह कोप करि सापा
Verse 4
तदपि तुम्हार साधुता देखी करिहउँ एहि पर कृपा बिसेषी
Verse 5
छमासील जे पर उपकारी ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी
Verse 6
मोर श्राप द्विज ब्यर्थ न जाइहि जन्म सहस अवस्य यह पाइहि
Verse 7
जनमत मरत दुसह दुख होई अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई
Verse 8
कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना
Verse 9
रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ
Verse 10
पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें राम भगति उपजिहि उर तोरें
Verse 11
सुनु मम बचन सत्य अब भाई हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई
Verse 12
अब जनि करहि बिप्र अपमाना जानेहु संत अनंत समाना
Verse 13
इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला कालदंड हरि चक्र कराला
Verse 14
जो इन्ह कर मारा नहिं मरई बिप्रद्रोह पावक सो जरई
Verse 15
अस बिबेक राखेहु मन माहीं तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं
Verse 16
औरउ एक आसिषा मोरी अप्रतिहत गति होइहि तोरी
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