Book 7 • Chapter 24
Section 24
9 verses
Verse 1
कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे
Verse 2
श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर गुनातीत अरु भोग पुरंदर
Verse 3
पति अनुकूल सदा रह सीता सोभा खानि सुसील बिनीता
Verse 4
जानति कृपासिंधु प्रभुताई सेवति चरन कमल मन लाई
Verse 5
जद्यपि गृहँ सेवक सेवकिनी बिपुल सदा सेवा बिधि गुनी
Verse 6
निज कर गृह परिचरजा करई रामचंद्र आयसु अनुसरई
Verse 7
जेहि बिधि कृपासिंधु सुख मानइ सोइ कर श्री सेवा बिधि जानइ
Verse 8
कौसल्यादि सासु गृह माहीं सेवइ सबन्हि मान मद नाहीं
Verse 9
उमा रमा ब्रह्मादि बंदिता जगदंबा संततमनिंदिता
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