Book 7 • Chapter 29
Section 29
8 verses
Verse 1
दूरि फराक रुचिर सो घाटा जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा
Verse 2
पनिघट परम मनोहर नाना तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना
Verse 3
राजघाट सब बिधि सुंदर बर मज्जहिं तहाँ बरन चारिउ नर
Verse 4
तीर तीर देवन्ह के मंदिर चहुँ दिसि तिन्ह के उपबन सुंदर
Verse 5
कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी
Verse 6
तीर तीर तुलसिका सुहाई बृंद बृंद बहु मुनिन्ह लगाई
Verse 7
पुर सोभा कछु बरनि न जाई बाहेर नगर परम रुचिराई
Verse 8
देखत पुरी अखिल अघ भागा बन उपबन बापिका तड़ागा
0:000:00
Speed: