Book 7 • Chapter 65
Section 65
8 verses
Verse 1
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा पुनि नृप बचन राज रस भंगा
Verse 2
पुरबासिन्ह कर बिरह बिषादा कहेसि राम लछिमन संबादा
Verse 3
बिपिन गवन केवट अनुरागा सुरसरि उतरि निवास प्रयागा
Verse 4
बालमीक प्रभु मिलन बखाना चित्रकूट जिमि बसे भगवाना
Verse 5
सचिवागवन नगर नृप मरना भरतागवन प्रेम बहु बरना
Verse 6
करि नृप क्रिया संग पुरबासी भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी
Verse 7
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए लै पादुका अवधपुर आए
Verse 8
भरत रहनि सुरपति सुत करनी प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी
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