Book 7 • Chapter 70
Section 70
8 verses
Verse 1
बोलेउ काकभसुंड बहोरी नभग नाथ पर प्रीति न थोरी
Verse 2
सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे कृपापात्र रघुनायक केरे
Verse 3
तुम्हहि न संसय मोह न माया मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया
Verse 4
पठइ मोह मिस खगपति तोही रघुपति दीन्हि बड़ाई मोही
Verse 5
तुम्ह निज मोह कही खग साईं सो नहिं कछु आचरज गोसाईं
Verse 6
नारद भव बिरंचि सनकादी जे मुनिनायक आतमबादी
Verse 7
मोह न अंध कीन्ह केहि केही को जग काम नचाव न जेही
Verse 8
तृस्नाँ केहि न कीन्ह बौराहा केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा
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