Book 7 • Chapter 71
Section 71
8 verses
Verse 1
गुन कृत सन्यपात नहिं केही कोउ न मान मद तजेउ निबेही
Verse 2
जोबन ज्वर केहि नहिं बलकावा ममता केहि कर जस न नसावा
Verse 3
मच्छर काहि कलंक न लावा काहि न सोक समीर डोलावा
Verse 4
चिंता साँपिनि को नहिं खाया को जग जाहि न ब्यापी माया
Verse 5
कीट मनोरथ दारु सरीरा जेहि न लाग घुन को अस धीरा
Verse 6
सुत बित लोक ईषना तीनी केहि के मति इन्ह कृत न मलीनी
Verse 7
यह सब माया कर परिवारा प्रबल अमिति को बरनै पारा
Verse 8
सिव चतुरानन जाहि डेराहीं अपर जीव केहि लेखे माहीं
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