Book 7 • Chapter 74
Section 74
8 verses
Verse 1
सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई कहउँ जथामति कथा सुहाई
Verse 2
जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही सोउ सब कथा सुनावउँ तोही
Verse 3
राम कृपा भाजन तुम्ह ताता हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता
Verse 4
ताते नहिं कछु तुम्हहिं दुरावउँ परम रहस्य मनोहर गावउँ
Verse 5
सुनहु राम कर सहज सुभाऊ जन अभिमान न राखहिं काऊ
Verse 6
संसृत मूल सूलप्रद नाना सकल सोक दायक अभिमाना
Verse 7
ताते करहिं कृपानिधि दूरी सेवक पर ममता अति भूरी
Verse 8
जिमि सिसु तन ब्रन होइ गोसाई मातु चिराव कठिन की नाईं
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