Book 7 • Chapter 75
Section 75
11 verses
Verse 1
राम कृपा आपनि जड़ताई कहउँ खगेस सुनहु मन लाई
Verse 2
जब जब राम मनुज तनु धरहीं भक्त हेतु लीला बहु करहीं
Verse 3
तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ बालचरित बिलोकि हरषाऊँ
Verse 4
जन्म महोत्सव देखउँ जाई बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई
Verse 5
इष्टदेव मम बालक रामा सोभा बपुष कोटि सत कामा
Verse 6
निज प्रभु बदन निहारि निहारी लोचन सुफल करउँ उरगारी
Verse 7
लघु बायस बपु धरि हरि संगा देखउँ बालचरित बहुरंगा
Verse 8
लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिं तहँ तहँ संग उड़ाउँ
Verse 9
जूठनि परइ अजिर महँ सो उठाइ करि खाउँ 75(क)
Verse 10
एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर
Verse 11
सुमिरत प्रभु लीला सोइ पुलकित भयउ सरीर 75(ख)
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