Book 7 • Chapter 76
Section 76
8 verses
Verse 1
कहइ भसुंड सुनहु खगनायक रामचरित सेवक सुखदायक
Verse 2
नृपमंदिर सुंदर सब भाँती खचित कनक मनि नाना जाती
Verse 3
बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई
Verse 4
बालबिनोद करत रघुराई बिचरत अजिर जननि सुखदाई
Verse 5
मरकत मृदुल कलेवर स्यामा अंग अंग प्रति छबि बहु कामा
Verse 6
नव राजीव अरुन मृदु चरना पदज रुचिर नख ससि दुति हरना
Verse 7
ललित अंक कुलिसादिक चारी नूपुर चारू मधुर रवकारी
Verse 8
चारु पुरट मनि रचित बनाई कटि किंकिन कल मुखर सुहाई
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