Book 7 • Chapter 86
Section 86
10 verses
Verse 1
अब सुनु परम बिमल मम बानी सत्य सुगम निगमादि बखानी
Verse 2
निज सिद्धांत सुनावउँ तोही सुनु मन धरु सब तजि भजु मोही
Verse 3
मम माया संभव संसारा जीव चराचर बिबिधि प्रकारा
Verse 4
सब मम प्रिय सब मम उपजाए सब ते अधिक मनुज मोहि भाए
Verse 5
तिन्ह महँ द्विज द्विज महँ श्रुतिधारी तिन्ह महुँ निगम धरम अनुसारी
Verse 6
तिन्ह महँ प्रिय बिरक्त पुनि ग्यानी ग्यानिहु ते अति प्रिय बिग्यानी
Verse 7
तिन्ह ते पुनि मोहि प्रिय निज दासा जेहि गति मोरि न दूसरि आसा
Verse 8
पुनि पुनि सत्य कहउँ तोहि पाहीं मोहि सेवक सम प्रिय कोउ नाहीं
Verse 9
भगति हीन बिरंचि किन होई सब जीवहु सम प्रिय मोहि सोई
Verse 10
भगतिवंत अति नीचउ प्रानी मोहि प्रानप्रिय असि मम बानी
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