Book 7 • Chapter 88
Section 88
8 verses
Verse 1
कबहूँ काल न ब्यापिहि तोही सुमिरेसु भजेसु निरंतर मोही
Verse 2
प्रभु बचनामृत सुनि न अघाऊँ तनु पुलकित मन अति हरषाऊँ
Verse 3
सो सुख जानइ मन अरु काना नहिं रसना पहिं जाइ बखाना
Verse 4
प्रभु सोभा सुख जानहिं नयना कहि किमि सकहिं तिन्हहि नहिं बयना
Verse 5
बहु बिधि मोहि प्रबोधि सुख देई लगे करन सिसु कौतुक तेई
Verse 6
सजल नयन कछु मुख करि रूखा चितइ मातु लागी अति भूखा
Verse 7
देखि मातु आतुर उठि धाई कहि मृदु बचन लिए उर लाई
Verse 8
गोद राखि कराव पय पाना रघुपति चरित ललित कर गाना
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