Book 7 • Chapter 89
Section 89
12 verses
Verse 1
मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला देखेउँ बालबिनोद रसाला
Verse 2
राम प्रसाद भगति बर पायउँ प्रभु पद बंदि निजाश्रम आयउँ
Verse 3
तब ते मोहि न ब्यापी माया जब ते रघुनायक अपनाया
Verse 4
यह सब गुप्त चरित मैं गावा हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा
Verse 5
निज अनुभव अब कहउँ खगेसा बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा
Verse 6
राम कृपा बिनु सुनु खगराई जानि न जाइ राम प्रभुताई
Verse 7
जानें बिनु न होइ परतीती बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती
Verse 8
प्रीति बिना नहिं भगति दिढ़ाई जिमि खगपति जल कै चिकनाई
Verse 9
बिनु गुर होइ कि ग्यान ग्यान कि होइ बिराग बिनु
Verse 10
गावहिं बेद पुरान सुख कि लहिअ हरि भगति बिनु 89(क)
Verse 11
कोउ बिश्राम कि पाव तात सहज संतोष बिनु
Verse 12
चलै कि जल बिनु नाव कोटि जतन पचि पचि मरिअ 89(ख)
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