Book 7 • Chapter 90
Section 90
12 verses
Verse 1
बिनु संतोष न काम नसाहीं काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं
Verse 2
राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा
Verse 3
बिनु बिग्यान कि समता आवइ कोउ अवकास कि नभ बिनु पावइ
Verse 4
श्रद्धा बिना धर्म नहिं होई बिनु महि गंध कि पावइ कोई
Verse 5
बिनु तप तेज कि कर बिस्तारा जल बिनु रस कि होइ संसारा
Verse 6
सील कि मिल बिनु बुध सेवकाई जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई
Verse 7
निज सुख बिनु मन होइ कि थीरा परस कि होइ बिहीन समीरा
Verse 8
कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा बिनु हरि भजन न भव भय नासा
Verse 9
बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु
Verse 10
राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु 90(क)
Verse 11
अस बिचारि मतिधीर तजि कुतर्क संसय सकल
Verse 12
भजहु राम रघुबीर करुनाकर सुंदर सुखद 90(ख)
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