Book 7 • Chapter 94
Section 94
8 verses
Verse 1
तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा सुमति सुसील सरल आचारा
Verse 2
ग्यान बिरति बिग्यान निवासा रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा
Verse 3
कारन कवन देह यह पाई तात सकल मोहि कहहु बुझाई
Verse 4
राम चरित सर सुंदर स्वामी पायहु कहाँ कहहु नभगामी
Verse 5
नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं
Verse 6
मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई सोउ मोरें मन संसय अहई
Verse 7
अग जग जीव नाग नर देवा नाथ सकल जगु काल कलेवा
Verse 8
अंड कटाह अमित लय कारी कालु सदा दुरतिक्रम भारी
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